ਸੜਕ ਹਾਦਸੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਮਸ਼ਹੂਰ ਰੇਸਲਰ ਦੀ ਹੋਈ ਦਰਦਨਾਕ ਮੌਤ , ਖੇਡ ਜਗਤ ਵਿੱਚ ਛਾਇਆ ਸੋਗ !

ਸੜਕ ਹਾਦਸੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਮਸ਼ਹੂਰ ਰੇਸਲਰ ਦੀ ਹੋਈ ਦਰਦਨਾਕ ਮੌਤ , ਖੇਡ ਜਗਤ ਵਿੱਚ ਛਾਇਆ ਸੋਗ !

भारत में क्रिकेट के बाद दूसरा सबसे पॉपुलर खेल रेसलिंग हैं. यहाँ के लोगो को रेसलिंग देखने के साथ साथ इसे खेलने का भी बहुत शौक हैं. भारत में कई सालो से लोग रेसलिंग करते आए हैं. यहाँ आज भी गाँवों में जगह जगह अखाड़े बने हैं जहाँ लोग रेसलिंग करने जाते हैं. ऐसे में रेसलिंग करने वाले खिलाडियों को भी यहाँ मान सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं. भारत के दो सबसे मशहूर रेसलर ‘दी ग्रेट खली’ और ‘जिंदर महल’ की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं हैं.

सड़क हादसे में जाने माने पहलवान सुखचैन सिंह चीमा का निधन

लेकिन हम इस खेल जगत से एक बेहद बुरी खबर आ रही हैं जिसके चलते पुरे खेल जगत में मातम छाया हुआ हैं. दरअसल अपने जमाने के मशहूर पहलवान और कोच सुखचैन सिंह चीमा की एक सड़क दुर्घटना के चलते मौत हो गई हैं. ये दुखद सड़क हादसा पटियाला बाईपास पर हुआ हैं. सुखचैन के बेटे पलविंदर के अनुसार बुधवार रात को पटियाला-संगरूर बाईपास पर उनके पिता अपने भनरी गाँव में स्थित फ़ार्म से कार में सवार वापस लौट रहे थे. इसी दौरान उनकी कार सामने से आ रही एक अन्य कार से टकरा गई जिसके चलते सुखचैन की कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. इस भीषण एक्सीडेंट की वजह से सुखचैन को कई गंभीर छोटे आई जिसके बाद उन्हें आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया. हालाँकि सुखचैन की उम्र अधिक होने के कारण उनकी रिकवरी नहीं हो सकती और उनका देहांत हो गया.
खेल जगत की कई हस्तियों ने किया शोक जाहिर

 

सुखचैन की मौत की खबर जैसे ही कुश्ती जगत में फैली तो शोक की लहर उमड़ पड़ी. खेल जगत की कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें श्रधांजलि देते हुए दुःख प्रकट किया. हाल ही में बीते शुक्रवार सुखचैन सिंह चीमा जी का अंतिम संस्कार भी हुआ हैं. उधर सोशल मीडिया पर भी कुश्ती के फेंस ने सुखचैन जी के निधन पर शौक प्रकट किया हैं.
अपने जमाने में जीत चुके हैं कई अवार्ड

 

बताते चल एकी सुखचैन साल 1974 में तेहरान में हुए एशियाई खेलों में कस्य पदक जीत भारत का नाम रोशन कर चुके हैं. सुखचैन अपनी झोली में अर्जुन अवार्ड के अतिरिक्त कोचिंग के लिए सर्वोच्‍च द्रोणाचार्य अवार्ड भी शामिल कर चुके हैं. सुखचैन का पटियाला में खुद का रेसलिंग ट्रेनिंग सेंटर हैं. उनके इस रेसलिंग सेटर का नाम ‘रुस्तमे ए हिन्द’ हैं. ये नाम उन्होंने अपने पिता जो कि फेमस रेसलर थे, के नाम पर रखा था. सुखचिं के पिता ‘रुस्तम ए हिन्द’ पहलवान केसर सिंह चीमा के नाम से मशहूर थे. अपने पिता को फॉलो करते हुए सुखचैन अपने इस अखाड़े में कई पहलवानों को कुश्ती के गुण सिखा चुके हैं. सुखचैन के बेटे पलविंदर भी अपने पिता की तरह अर्जुन अवार्ड अपने नाम कर चुके हैं. अपने पिता की राह पर चलते हुए वे भी ओलिंपिक खेलों में भारत की ओर से खेल चुके हैं.

सुखचैन की मौत के बाद उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे रह गए हैं. इस बीच पंजाब के कल्चरल अफेयर्स और टूरिज्म मिनिस्टर नवजोत सिंह सिधु ने भी सुखचैन की मौत पर गहरा दुःख जाहिर किया हैं.

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